ठेका, लापरवाही और लालच… मोरबी में मौत के पुल की कहानी शुरू से आखिर तक… – gujarat morbi bridge collapse full story ntc


कोई टूटे हुए पुल पर लटक रहा था तो कोई पानी में हाथ पैर मार रहा था. कोई बचे हुए पुल के हिस्से तक पहुंचने की कोशिश में तड़प रहा था. हर तरफ सिर्फ चीख पुकार थी. गुजरात के मोरबी में लोगों ने जो मौत का मंजर देखा, वह निशब्द रह गया. देश को झकझोर देने वाला ये हादसा कई परिवारों को जीवन भर का दुख दे गया. लेकिन इस हादसे को दावत तो 5 दिन पहले यानी 26 अक्टूबर को गुजराती नव वर्ष पर दे दी गई थी, जब 6 महीने के मेंटेनेंस के बाद इसे खोला गया. जबकि कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक इस ब्रिज को 8-12 महीने की मरम्मत के बाद खोला जाना था. इतना ही नहीं ब्रिज का मैनेजमेंट करने वाली अजंता कंपनी ने बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के ही खोल दिया.

143 साल पुराना था ब्रिज

मोरबी की शान कहलाए जाने वाला केबल ब्रिज 143 साल पुराना था. 765 फुट लंबा और 4 फुट चौड़ा ये पुल एतिहासिक होने के कारण गुजरात टूरिज्म की लिस्ट में भी शामिल किया गया था. आजादी से पहले ब्रिटिश शासन में मोरबी ब्रिज का निर्माण किया गया था. मच्छु नदी पर बना यह ब्रिज मोरबी का प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट था. मोरबी के राजा वाघजी रावजी ने केबल ब्रिज (झूलता हुआ पुल) बनवाया था. जिसका उद्घाटन 1879 में किया गया था. ब्रिटिश इंजीनियरों के द्वारा बनाए गए इस पुल के निर्माण में आधुनिकतम तकनीक का इस्तेमाल किया गया था.

लापरवाही हादसे की वजह

मोरबी हादसे में भारी लापरवाही की बात सामने आ रही है. मोरबी नगरपालिका ने अजंता कंपनी से मेंटेनेंस के लिए कॉन्ट्रैक्ट किया था. इसके मुताबिक, कंपनी को पुल का 8-12 महीने तक मेंटेनेंस करना था, इसके बाद इसे खोला जाना था. लेकिन इसे समय से पहले ही खोल दिया गया. चौंकाने वाली बात ये थी कि इसे खोलने से पहले किसी तरह की मंजूरी भी नहीं ली गई. ब्रिज 5 दिन तक खुला रहा, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई. ब्रिज की मरम्मत 2 करोड़ रुपए में हुई थी. मरम्मत के नाम पर ब्रिज पर पेंट किया गया था. इसके अलावा ब्रिज की प्लेट्स बदली गई थीं. कुछ और छोटा मोटा काम भी किया गया था. 

अजंता कंपनी (ओरेवा ग्रुप) को मोरबी पुल के मैनेजमेंट का 15 साल का कॉन्ट्रैक्ट मिला था. बताया जा रहा है कि कंपनी ने कथित तौर पर इसका रेनोवेशन का ठेका थर्ड पार्टी (देव प्रकाश सॉल्यूशन)  को दिया. कंपनी ने मोरबी पुल के रेनोवेशन का काम किया और इसके बाद इसे शुरू  कर दिया. लेकिन कंपनी द्वारा काम की जानकारी मोरबी नगरपालिका को भी नहीं दी गई. न ही इसका प्रोपर क्वालिटी चेक हो पाया. इसलिए नगरपालिका ने इसका फिटनेस सर्टिफिकेट भी जारी नहीं किया था. इसके बावजूद कंपनी ने ब्रिज को शुरू कर दिया. 

100 की क्षमता वाले पुल पर भीड़ कैसे? 

बताया जा रहा है कि ब्रिज पर भीड़ अधिक होने के चलते ये हादसा हुआ. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर 100 लोगों की क्षमता वाले पुल पर 300-400 लोग कैसे पहुंच गए. कंपनी भीड़ के बावजूद लोगों को टिकट क्यों जारी करती रही. प्रशासन और ब्रिज का मैनेजमेंट करने वाली कंपनी लोगों से टिकट तो वसूल रही थी. लेकिन उनके पास भीड़ को काबू करने का कोई इंतजाम नहीं था.

मोरबी में मौत के पुल की कहानी

रविवार का दिन था. गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी पर बना केबिल ब्रिज भीड़ से खचाखच भरा था. आलम यह था कि 100 लोगों की क्षमता वाले इस पुल पर 300-400 लोग थे. कुछ लोग सेल्फियां लेने में व्यस्त थे, तो कुछ युवा इस झूलते ब्रिज को जानबूझकर हिला रहे थे. तभी अचानक पुल टूट गया. देखते ही देखते 300-400 लोग नदी में गिर गए. कुछ लोगों ने ब्रिज के बाकी हिस्से तो कुछ लोगों ने रस्सियों पर लटकने की कोशिश की. इनमें से कुछ अपनी जान बचाने में सफल भी हुए. जबकि सैकड़ों लोग नदी में समा गए. इस हादसे में अब तक 134 लोगों की मौत हो गई.

अब तक क्या क्या कार्रवाई हुई?

ब्रिज का मैनेजमेंट करने वाली कंपनी पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है. जांच के लिए कमेटी बना दी गई है. कंपनी पर 304, 308 और 114 के तहत क्रिमिनल केस दर्ज किया गया है. मामले की जांच शुरू कर दी गई है. मोरबी हादसे में 134 लोगों की मौत के बाद अब पुलिस एक्शन में आ गई है. हादसे के अगले दिन सोमवार को पुलिस ने 9 लोगों से गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार लोगों में ठेकेदार, मैनेजर, टिकट क्लर्क और सिक्योरिटी गार्ड तक शामिल हैं. 

 

 



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