पटियालाः पॉलिटिक्स हो या पैग दोनों King size!


विलासिता और भव्यता के भूप भूपिंदर सिंह

महाराजा भूपिंदर सिंह भारत में विलासिता और भव्यता के जीवंत प्रतीक थे. जिस पटियाला पैग की चर्चा महफिलों और पार्टियों में होती है वह भूपिंदर सिंह की ही खोज थी. 9 नवंबर 1900 को अपने पिता, महाराजा राजिंदर सिंह की मृत्यु के बाद, 9 साल की उम्र में ही भूपिंदर सिंह पटियाला की गद्दी पर आसीन हुए. एक काउंसिल ऑफ रीजेंसी ने उनके नाम पर शासन किया, जब तक कि उन्होंने 1 अक्टूबर 1909 को अपने 18 वें जन्मदिन से कुछ समय पहले आंशिक शक्तियां नहीं ले लीं.

18 साल के युवा भूपिंदर सिंह शौकीन तबीयत और रंगीन मिजाज शख्स थे. दावा किया जाता है कि वे भारत के पहले व्यक्ति थे जिनके पास विमान था, इस विमान को उन्होंने 1910 में यूनाइटेड किंगडम से खरीदा था. इस विमान के लिए उन्होंने पटियाला में एक हवाई पट्टी बनाई थी. वह शायद पटियाला के सबसे प्रसिद्ध महाराजा हैं, जो अपनी फिजूलखर्ची और क्रिकेटर होने के लिए जाने जाते हैं.

किंवदंती है कि उनके काफिले में 20 रॉल्स रॉयस कारें थीं. इन कारों को खरीदने को लेकर कई कहानियां गूगल में मिलती हैं. जहां बताया गया है कि जब ब्रिटेन में रॉल्स रॉयस के शो रूम में भूपिंदर सिंह इन कारों के बारे में जानकारी मांगने गए तो, सेल्समैन ने भारतीय समझकर उन्हें कहा कि ये महंगी कारें वे नहीं खरीद पाएंगे. इस कथित अपमान से भूपिंदर सिंह इतने नाराज हुए कि उन्होंने 20 की 20 रॉल्स रॉयस कारें खरीद ली. भूपिंदर सिंह ने किंग साइज लाइफ को अक्षरश: जीया.



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