वाराणसी नगर निगम का 5 साल में नहीं बना सदन, मेयर मृदुला पर हावी रहा निगम प्रशासन – Municipal administration dominated on Varanasi mayor Mridula jaiswal did not get roof for house session in 5 years lcls 


मंचों पर मिली उपलब्धि के अलावा वाराणसी की मेयर मृदुला जायसवाल पर नगर निगम बीते पांच वर्षों में हावी रहा. जानकर हैरानी होगी कि सदन सभागार न होने के चलते सदन का अधिवेशन अलग-अलग स्थानों पर होता रहा. गौरतलब है कि नगर निगम का सदन रुद्राक्ष कंवेंशन सेंटर के निर्माण में चला गया था. 

तभी से वाराणसी नगर निगम अपने लिए सदन खोजता रहा. निर्वाचित नगर निगम के पांच साल बीत जाने के बावजूद सदन के निर्माण का काम तो दूर, पहल तक नहीं हुई. इसके चलते वाराणसी में कभी सदन का अधिवेशन सांस्कृतिक संकुल, तो कभी टाॅउनहाॅल में हुआ. 

इतना ही नहीं इसके लिए नगर निगम को किराया भी खर्च करना पड़ा. ऐसा तब हुआ है जब पिछले निकाय चुनाव से पूर्व प्रशासन ने वादा किया था कि दो साल में ही मिनी सदन बनकर तैयार हो जाएगा. बात यहीं पर खत्म नहीं होती है पांच साल में अधिनियम के तहत न तो कार्यकारिणी की बैठक हुई और न ही अधिवेशन. 

पार्षदों पर भी नगर निगम हावी रहा 

नगर निगम अधिनियम के मुताबिक, साल में कार्यकारिणी की 6 बैठक और 12 अधिवेशन होने चाहिए. सिर्फ मेयर पर ही नहीं वाराणसी नगर निगम के पार्षदों पर भी नगर निगम प्रशासन भारी रहा. पार्षदों के क्षेत्र में विकास कार्य लंबित रहें, लेकिन उनकी मांग अनसुनी रही. 

कभी एकाध मौके ऐसे जरूर आए, जब मेयर मृदुला जायसवाल ने सदन और कार्यकारिणी की बैठक में नाराजगी जाहिर की. मगर, अधिकारियों पर इसका असर नहीं हुआ. यहां तक कि पार्षदों का विरोध-प्रदर्शन और धरना भी काम नहीं आया. 

इतना ही नहीं स्मार्ट सिटी के नियमों के तहत शहर के विकास कार्यों से मेयर तक को दूर रखा गया. जबकि निगम अधिनियम के तहत निगम सीमा क्षेत्र में निगम सदन की मंजूरी के बिना कोई काम नहीं हो सकता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

मेयर मृदुला जायसवाल.

मेयर सीट पर 25 साल से है भाजपा का कब्जा  

वाराणसी नगर निगम बनने के साथ ही इसके मेयर की सीट पर बीजेपी का ही कब्जा है. पिछले 25 वर्षों से वाराणसी के नगर निगम की सीट पर किसी न किसी प्रत्याशी के जरिये भाजपा का ही दबदबा रहा है. मौजूदा समय में इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी की मृदुला जायसवाल का कब्जा है. 

दरअसल, पिछड़ी जाति की महिला प्रत्याशी के लिए आरक्षित इस सीट पर कब्जा जमाने वाली मृदुला जायसवाल का मेयर बनने के पहले राजनीति में सक्रिय नहीं थी. हालांकि, पहले वह संघ से जरूर जुड़ी थीं. उनके ससुर वाराणसी के पूर्व भाजपा सांसद स्वर्गीय शंकर प्रसाद जायसवाल की वजह से उनको पहचान मिली और इसी वजह से उनको इस प्रतिष्ठित सीट पर चुनाव लड़ने का मौका भी मिला था. 

मृदुला जायसवाल सक्रिय राजनीति में नहीं थीं 

वाराणसी की मौजूदा भाजपा मेयर मृदुला जायसवाल भले ही राजनीति में सक्रिय न रही हो. मगर, लगभग 42 साल की मृदुला जायसवाल विश्व हिंदू परिषद में महर्षि वाल्मीकि सेवा संस्था, नौगढ़ और संघ में महिला वाहिनी से जुड़ी रही हैं. 

इसके अलावा वह जिला उद्योग व्यापार मंडल, रोटरी क्लब इनरव्हील क्लब और कई अन्य सामाजिक संगठनों से भी जुड़ी रही हैं. मेयर मृदुला जायसवाल ने रसायन विज्ञान से स्नातकोत्तर की शिक्षा हासिल की है. उनके पति राधाकृष्ण जायसवाल ऑटोमोबाइल कारोबारी है. 

मेयर बनने के बाद मृदुला जायसवाल पर पीएम मोदी के स्वच्छ भारत मिशन को साकार करने के लिए काशी जैसे पुरातन शहर में एक बड़ी चुनौती थी. अभी पिछले साल ही गंगा किनारे बसे शहरों में वाराणसी के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण में पहला स्थान मिला. इसके लिए उनको 20 नवंबर 2021 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रशस्ति पत्र और ट्रॉफी देकर सम्मानित भी किया.

मृदुला जायसवाल की चुनावी लड़ाई 

मेयर मृदुला जायसवाल, वाराणसी के सांसद रहे शंकर प्रसाद जायसवाल की पुत्रवधु हैं. मेयर बनने से पूर्व तक वो गृहणी ही रहीं. मेयर सीट ओबीसी महिला आरक्षित होने के चलते भाजपा ने मृदुला जायसवाल को प्रत्याशी बनाया. उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी शालिनी यादव को हराया कर भाजपा की झोली में लगातार पांचवीं बार मेयर पद का तोहफा सौंपा. 

मेयर बनते ही उन्होंने संस्कृत भाषा में शपथ ली. पीएम मोदी के काशी को क्योटो बनाने के इतर वह काशी को पुरातन को बनाए रखने पर जोर देने वाली बात कहकर सुर्खियों में आई थीं. मृदुला जायसवाल ने एक लाख 92 हजार 188 मतों से जीत हासिल की थी और मतगणना के पहले राउंड से ही बढ़त बनाई हुई थी. उन्हे कांग्रेस की प्रत्याशी शालिनी यादव से कड़ी टक्कर मिली थी, जिन्हें एक लाख 13 हजार 345 मत मिले थे. इसके अलावा सपा की साधना गुप्ता को 99 हजार 227 वोट मिले थे. 

डायरेक्ट निर्वाचन में दो महिला मेयर

नगर निगम के इतिहास में जब से सीधे जनता मेयर का चुनाव करने लगी, बनारस को दो महिला मेयर मिलीं. पहली महिला मेयर सरोज सिंह और दूसरी मृदुला जायसवाल बनीं. सरोज सिंह के कार्यकाल में मिनी सदन में बढ़िया अधिवेशन हुए. नगर विकास के कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित हुए. 

बताया जाता है कि बतौर पीठासीन अधिकारी सरोज सिंह ने बखूबी सदन संचालित किया. तब पक्ष-विपक्ष में धुरंधर पार्षद रहे जैसे दैव दत्त तिवारी, नारायण मिश्र, डिप्टी मेयर संजय राय, मनोज राय धूपचंडी, अमरदेव (समाजवादी पार्टी) सदन में जोरदार बहस होती थी. मगर, मृदुला जायसवाल के कार्यकाल में ऐसा देखने को नहीं मिला.

वाराणसी नगर निगम के जनता द्वारा चुने मेयर

1- सरोज सिंह
2- अमर नाथ यादव
3- कौशलेंद्र सिंह
4- राम गोपाल मोहले
5- मृदुला जायसवाल

 



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