Ukraine Crisis: रूस को क्यों धमका रहा है अमेरिका? यूक्रेन प्रेम के पीछे ये कहानी! – Why Ukraine matters to united states russia military crisis impact on economy tuts


स्टोरी हाइलाइट्स

  • यूक्रेन है अमेरिकी ईंधन का बड़ा बाजार
  • भौगोलिक स्थिति बनाती है आर्थिक रूप से अहम

यूक्रेन को लेकर मचे घमासान (Ukraine Crisis) के बीच रूस (Russia) ने मंगलवार को सीमा से कुछ सैनिकों को वापस बुलाने का ऐलान किया. रूस के इस फैसले से पूर्वी यूरोप (Eastern Europe) में जंग का खतरा कुछ नरम तो पड़ा है, लेकिन अभी भी पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है. अमेरिका (US) ने रूस के ऐलान से पहले मंगलवार को यह मसला बातचीत से सुलझाने की बात दोहराई. यहां तक कि अमेरिका ने यूक्रेन पर हमला करने की स्थिति में रूस को गंभीर खामियाजा भुगतने की धमकी भी दी. इन घटनाक्रमों के बीच हर किसी के मन में ये सवाल उठ रहा है कि आखिर अमेरिका यूक्रेन के पक्ष में इतनी मजबूती से क्यों खड़ा है? दरअसल यूक्रेन के मसले पर अमेरिकी स्टैंड के राजनीतिक और सामरिक मायने तो हैं ही, इसके पीछे आर्थिक पहलुओं की भी कमी नहीं है.

यूक्रेन संकट के पीछे तेल का ये खेल

इलेक्ट्रिक कारों (Electric Car) का चलन बढ़ने और ग्रीन एनर्जी (Green Energy) पर जोर दिए जाने के बाद भी ग्लोबल इकोनॉमी (Global Economy) फिलहाल कच्चा तेल (Crude Oil) पर निर्भर है. अभी आने वाले कुछ और दशक तक कच्चा तेल ही ग्लोबल ग्रोथ की दशा-दिशा तय करते रहेगा. यूक्रेन कभी रूस का हिस्सा हुआ करता था, लेकिन सोवियत संघ (Soviet Union) के विघटन के बाद यह अलग देश बन गया. यूक्रेन कैस्पियन सागर (Caspian Sea) के उस हिस्से पर स्थित है, जहां क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस (Natural Gas) का अकूत भंडार मिला है. इसके अलावा यूक्रेन कई नेचुरल मिनरल्स (Natural Minerals) का भंडार भी है. वर्ल्ड डेटा सेंटर (Wolrd Data Centre) के अनुसार, सेमीकंडक्टर (Semiconductor) के लिए अहम रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Minerals) के मामले में यह छोटा देश यूरोप में सबसे समृद्ध है.

एक्सपर्ट की राय: अमेरिका को यूक्रेन से परोक्ष आर्थिक फायदे

दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एवं सामरिक मामलों के एक्सपर्ट डॉ सुधीर सिंह (Dr Sudhir Singh) इस बारे में बताते हैं कि यूक्रेन अर्थव्यवस्था के लिहाज से खास महत्वपूर्ण नहीं है. यूक्रेन पूर्वी यूरोप में स्थित है और इस इलाके को यूरोप का गरीब हिस्सा माना जाता है. यूक्रेन की जीडीपी (Ukraine GDP) का साइज भी कोई खास नहीं है. कल ही अमेरिका ने यूक्रेन के लिए 1 बिलियन डॉलर की मदद का ऐलान किया है. अमेरिका के लिए यूक्रेन से सीधे तौर पर खास आर्थिक लाभ नहीं है, लेकिन परोक्ष रूप से यह फैक्टर मायने रखता है. यूक्रेन की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि जंग होने पर न सिर्फ यूरोप बल्कि एशिया का भी हवाई मार्ग बाधित हो जाएगा. यूक्रेन के रास्ते मध्य यूरोप को होने वाली गैस-तेल सप्लाई भी खतरे में पड़ सकती है.

अमेरिका को ये सामान बेचता है यूक्रेन 

अमेरिका और यूक्रेन के व्यापार संबंधों को देखें तो यहां भी मेटल्स का हिस्सा काफी ज्यादा है. अमेरिका में यूक्रेन के दूतावास (Ukraine Embassy in US) के आंकड़े बताते हैं कि दोनों देशों का आपसी व्यापार 4 बिलियन डॉलर से ज्यादा का है. साल 2020 में कोरोना महामारी के चलते यह करीब 7.5 फीसदी गिरकर 3.94 बिलियन डॉलर रहा था. इसमें से यूक्रेन करीब 1 बिलियन डॉलर के सामान अमेरिका को बेचता है. इसका 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सा फेरस मेटल्स एंड आर्टिकल्स का है. यूक्रेन अमेरिका को अन्य खनिजों की भी ठीक-ठाक सप्लाई करता है.

यूक्रेन है ईंधन का उभरता बाजार

दूसरी ओर अमेरिका के लिए यूक्रेन ईंधन (Fuel) का उभरता बाजार है. सोवियत के विघटन के बाद आजाद हुए लगभग सारे देशों की तरह यूक्रेन भी पारंपरिक तौर पर ईंधन (तेल और गैस) के लिए रूस पर निर्भर रहता आया है. 2014 में क्रीमिया (Crimea Crisis) को लेकर हुए विवाद के बाद यूक्रेन ने रूस के तेल पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया, जिसका फायदा अमेरिका को हुआ. अभी यूक्रेन को होने वाले कुल अमेरिकी निर्यात में तेल का हिस्सा 20 फीसदी से ज्यादा है. जैसे-जैसे यूक्रेन तेल के लिए रूस पर निर्भरता कम करते जाएगा, अमेरिका के लिए बाजार बड़ा होता जाएगा.

इतनी हो रही हथियारों की खरीद

अमेरिका के लिए यूक्रेन एक शानदार डिफेंस मार्केट भी है. पिछले साल अमेरिका ने यूक्रेन को 650 मिलियन डॉलर के सैन्य हथियार दिए थे. यह 2014 के बाद किसी भी साल में यूक्रेन को मिले सबसे ज्यादा हथियार हैं. अभी रूस के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका ने यूक्रेन को 200 मिलियन डॉलर के हथियार उपलब्ध कराए हैं.

वर्चस्व बनाए रखने के लिए यूक्रेन जरूरी

मौजूदा वर्ल्ड ऑर्डर के पिरामिड में अमेरिका सबसे ऊपर स्थित है. इस ऑर्डर के बने रहने के लिए भी यूक्रेन अहम है. अगर रूस यूक्रेन पर कब्जा कर लेता है तो पोलैंड जैसे कुछ वैसे देशों की सीमा सीधे रूस से कनेक्ट हो जाएगी, जिनका अमेरिका से करीबी संबंध है. इससे न सिर्फ पूर्वी यूरोप बल्कि मध्य यूरोप में भी अमेरिका का वर्चस्व कम हो सकता है.

 



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